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अजनबियों से जुड़ी 10 बातें, जो हर बच्चे के लिए जरूरी है और आपके लिए भी

2 साल की संध्या घर के आंगन में खेल रही थी, पापा दफ्तर में थे और मां किचन में। उन्हें पता ही नहीं चला कि कब एक अजनबी टॉफी के बहाने संध्या को घर से बाहर ले गया। आज पांच साल बीत गए, हजार कोशिशों के बाद भी संध्या घर नहीं पहुंची है। पुलिस की जांच एक वक्त के बाद रुक गई, लेकिन माता-पिता की आंखें आज भी हर बच्ची में अपनी संध्या को खोजती है।

संध्या अकेली ऐसी बच्ची नहीं है, उन हजारों-लाखों बच्चियों में से एक है, जिन्हें अजनबी उठाकर ले गए, न जाने कहां? भारत में रोज़ाना गायब होने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आमतौर पर हम बच्चों को अपनी नज़र के सामने रखते हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं हो सकता। स्कूल जाते या लौटते वक्त, घर के आसपास खेलते समय उनका सामना ऐसे लोगों से हो सकता है, जो उनको नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दरअसल, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि हम-आप अपने बच्चों को ये नहीं सिखाते कि वे किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं। कौन अच्छे अंकल/आंटी है और किनसे दूर रहना है। ‘अजनबियों से होने वाले खतरे’ बच्चे समझते ही नहीं। अगर आप ध्यान दें तो एक सिपंल रूल है, जो आपको अपने बच्चे को समझाना चाहिए- ‘अजनबियों से दूर रहो।’ इसके अलावा कुछ और बातें हैं, जिसे बच्चों को सिखाने की जरूरत है। आइए उन पर एक नज़र डालें-
1-अजनबी कौन?
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बच्चे विले समझते हैं। कार्टून/फिल्म से ऐसे बुरे लोगों को वो बहुत अच्छे से पहचान लेते हैं। बच्चों को ये बताने की जरूरत है कि अजनबी, विलेन से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। उन्हें बेहद आसान शब्दों में समझाइए- हर वो अजनबी आपको नुकसान पहुंचा सकता है, जिसे आप नहीं जानते, जिसे आपने नहीं देखा या कभी बात नहीं की।
2-सभी अजनबी बुरे नहीं होते-
बुरे अजनबी और अच्छे अजनबी की पहचान करने में आप बच्चे की मदद करें। पुलिसवाले से मिलाएं और बताएं कि मुसीबत में ये वर्दी पहने वाले अजनबी अंकल आपकी मदद कर सकते हैं, पड़ोस में रहने वाली आंटी आपकी मदद कर सकती हैं, लेकिन एक ऑटोवाला या बस वाला नहीं।
3-खतरनाक जगहों की पहचान
बच्चों के लिए इंटरनेट ही नहीं है बल्कि और भी कई जगह हैं जहां उनके लिए खतरा है। बच्चों को बताएं कि सुनसान मकान, पार्किंग लॉट, अंधेरी गलियां और रास्ते जैसी जगहों पर खतरा है, वहां नहीं जाना चाहिए।
4-ये हैं सेफ प्लेस
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खतरनाक जगहों के साथ बच्चे को सेफ प्लेसेस भी बताने चाहिए। जैसे पुलिस स्टेशन या किसी परिचित का घर, अगर स्कूल/कोचिंग के रास्ते में पड़ता है, तो उसे बताइए कि किसी भी मुश्किल घड़ी में यहां पहुंचकर मदद ले सकता है। अपने परिचितों के घर बच्चों को लेकर जाएं, तो वो भी अच्छे से पहचान सकें।
5-टच कैसा है?
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ये बच्चों को क्यों समझाना चाहिए, शायद आप समझ गए होंगे। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप बच्चे से लगातार बात करते रहें। बच्ची है, तो ये शायद सबसे जरूरी बात होगी। बच्चे/बच्ची से पूछें कि उन्हें कोई घर आने वाले अंकल/भइया कैसे टच तो करते हैं, टीचर का बिहेवियर कैसा है, वे कैसे बात करते हैं और कैसे सिखाते हैं, वगैरह-वगैरह। ये बातें बच्चों को Gentle Touch के मतलब बता देंगी और वे खुद ही समझ जाएंगे कि कौन सही है और कौन गलत।
6- बच्चों को 'न' कहना सिखाएं
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बच्चों को मैनर्स, एटिकेट्स के साथ कुछ बातों में ‘न’ करना सिखाना चाहिए। अगर कोई टच करें या गोद में लेने की कोशिश करें, तो उन्हें ‘न’ करना है, ये बच्चे को बताना होगा। ‘गोद में उठाकर वो अंकल ले जाएंगे, फिर आपके साथ...करेंगे,’ जैसे उदाहरण देंगे तो वे आसानी से समझ भी जाएंगे।
7-बच्चों को कंट्रोल न करें, कंट्रोलिंग दें
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‘तुम मेरी नज़रों के सामने ही रहना’ की जगह ‘वहां रहो, जहां से मैं तुम्हें देख सकूं’ कहना बच्चों में कंट्रोलिंग पॉवर बढ़ाता है। आप उनके प्रोटेक्टर हैं और वे खुद अपनी प्रोटेक्शन कर सकते हैं, दोनों में फर्क है। बच्चों में ये बताना जरूरी है कि वे खुद को प्रोटेक्ट कर सकते हैं।
8- फैमिली का सीक्रेट कोडवर्ड
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ऐसा कुछ, जो आसानी से याद रहे, सबको, फैमिली पासवर्ड बनाइए। जैसे- शेर आया। बच्चों को बताइए कि अगर उन्हें कोई अजनबी घर ले जाने के लिए आए (तुम्हारी मम्मी/पापा ने भेजा है तुम्हें लाने के लिए/जल्दी चलो तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट हो गया है) तो ये पासवर्ड पूछें। अगर वो न बता पाए, तो उस पर भरोसा न करें और घर से तुरंत कॉन्टेक्ट करें।
9- भागे नहीं, बात करें
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बच्चे को आप अजनबियों से खतरे बताएंगे, तो वे हर किसी से बात करने से भी घबराएंगे। बेहतर होगा उन्हें बात करना सिखाएं। उन्हें बताना होगा ताकि वे सामना कर कह सकें- ‘मैं आपको नहीं जानता/जानती, आप चले जाइए या मुझसे दूर रहिए।’
10- दूसरे बच्चों के साथ खेलना सिखाएं
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बच्चों को बताइए कि वे दूसरे बच्चों के साथ खेलें। ये उनका सर्किल तो बड़ा करेगा ही, उन्हें सेफ भी रखेगा। आमतौर पर देखा गया है कि ग्रुप्स में खेलने वाले बच्चों को कम खतरा होता है।

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